१४. सदाव्रत तथा अन्नसत्र
स्वामिनारायण ने परोपकारी कार्य तथा समाजजीवन की धारणा के लिए दान तथा पुण्य को आवश्यक माना। गरीबों के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त करते हुए स्वामिनारायण ने कहा : ‘गरीब तो मुझे अधिक प्रिय हैं। जो उनकी क्षुधा को शांत करेगा वह मुझे प्रिय है।’ उन्होंने गरीब तथा दरिद्र मनुष्यों की सेवा की महिमा, सार्वजनिक अन्नसत्रों को खोलकर बताई। जगह-जगह आरंभ किए हुए सदाव्रतों से भूखें तथा अर्धभूखें लोगों को राहत मिली। उन्होंने उनके साधुओं तथा अनुयायीओं द्वारा जहाँ जरूरी हो वहाँ कुँए, बावड़ी, तालाब आदि खुदवाए; इसके अतिरिक्त भिन्न-भिन्न अनेक तरीकों से सहायताकर उनकी स्थिति को सुधारा। इससे लोग सदाचार तथा नीति के मार्ग पर चलने को प्रेरित हुए।