२३. पवित्र शास्त्रों की भेंट
श्री स्वामिनारायण ने उत्तम आचारसंहिता ‘शिक्षापत्री’ की रचनाकर मनुष्य को आचारशुद्धि, धर्मशुद्धि एवं व्यवहारशुद्धि का जतन करते किये। परमात्मा की परावाणी ‘वचनामृत’ ग्रंथ देकर मनुष्यों को विचारमय तथा उच्च आध्यात्मिक जीवन जीने को प्रेरित किये। इस प्रकार देह तथा जीव दोनों का श्रेष्ठ कल्याण हो एसे दो पवित्र शास्त्रों की उन्होंने मनुष्यकूल को भेंट दी।