१५. स्त्रियों की उन्नति

स्वामिनारायण ने स्त्रीयों की उन्नति के लिए उस जमाने में नवीन लगे ऐसी अनेक प्रवृत्तियों का प्रारंभ किया। उन्हें अक्षरज्ञान दिलाने की व्यवस्था की। स्त्रियों को सामाजिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक तालिम देकर श्रेष्ठ विदुषीयाँ बनाई। उनके लिए अलग संस्थाओं को स्थापित कर उनमें उपदेष्ठा के रूप में स्त्रियों की ही नियुक्ति की। वे स्वयं के तंत्र का स्वयं ही संचालन करें ऐसी व्यवस्था की; मोक्षमार्ग की साधना में स्त्रियों को समान अधिकार दिया। त्याग तथा दीक्षा विधि में भी स्वामिनारायण ने स्त्रियों को समान अधिकार दिया। विधवा स्त्रियों को सांख्यधर्म पालन करने का आदेश देकर प्रभुभक्ति में संलग्न किया।